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2 मई तक 2 डिग्री बढ़ेगा तापमान:भीषण गर्मी के 2 कारण- पहाड़ों तक पश्चिमी विक्षोभ, राजस्थान में एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन

हरियाणा के करनाल जिले में गर्मी ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आगामी 2 मई तक पारा दो डिग्री और बढ़कर 44 डिग्री तक जाएगा। इसके पीछे मौसम वैज्ञानिकों ने दो कारण बताए हैं। एक तो पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ा तक रूका हुआ है और दूसरा एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन राजस्थान के आसपास बना हुआ है।

ऐसे में आने वाले कुछ दिनों में गर्मी और ज्यादा बढ़ने की संभावना है। अभी से ही गर्मी के कारण शहर में लोगों की आवाजाही नाममात्र की रह गई है। सड़कें सुनसान नजर आने लगी हैं। ऐसे मौसम में बच्चों, बुजुर्गों के अलावा पुशओं का भी ध्यान रखने की जरूरत है। ज्यादा जरूरी न हो तो दोपहर के समय घर से बाहर बिल्कुल न निकलें।

करनाल में 1941 के बाद ऐसा मौसम

कृषि मौसम विज्ञान के डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि करनाल की बात की जाए तो शुक्रवार का तापमान 42.8 डिग्री रहा। पिछले आंकड़ों से तुलना करें तो 1941 के बाद तापमान 40 डिग्री सेलिसियस से ऊपर चल रहा है। 10 से 15 दिन पहले गर्मी आ गई हैं और 1 मई तक तो 44 डिग्री तापमान हो जाएगा।

पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ों तक सीमित है। मैदानी इलाकों पर इसका असर कम हो रहा है। दूसरा एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन राजस्थान के आसपास बना हुआ है। इससे आने वाले दिनों में तापमान में 1 से 2 डिग्री तक और बढ़ने की संभावना है। आने वाली 2 मई की रात से पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखेगा।

3 व 4 को हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है। 3 दिन पहले रात को 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चली थीं। ऐसा तब होता है, जब जमीन गर्म होती है। तापमान बहुत ज्यादा रहता है और कम दवाब का क्षेत्र रहता है। हवा चलती है, जो अंधड़ का रूप ले लेती है। उससे जन जीवन प्रभावित होता है।

पशुओं को 3 बार नहलाएं

डाॅ. पंकज कुमार सारस्वत ने बताया कि गर्मी के मौसम में पशुओं का ध्यान रखने की जरूरत है। इस मौसम में पशु चारा कम खाते हैं। ऐसे में पशुओं को स्वच्छ जल पीने के लिए मुहैया कराएं। दिन में दो बार नहालाएं। छाया व हवादार स्थान पर रखें। इसके साथ-साथ खाने में मिश्रण के लिए हरे चारे का प्रयोग करें।

कुछ अदल-बदल हो जाए तो बहुत अच्छा रहेगा। 2 से 3 बार ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाएं। जमीन खाली होने के बाद ज्यादातर किसानों ने मूंग लगाई है। उसमें सिंचाई का प्रबंध रखें। ज्यादा तापमान एकदम होने से उनकी पकाई में दिक्कत आएगी। धान से पहले डैंचा बो कर खेत में प्रयोग करें।

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